रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थ क्या कहलाते हैं?

रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थ क्या कहलाते हैं?

आपके इर्द्द गिर्द हर जगह रासायनिक अभिक्रियाएं होती हैं। सूरज जल को उदाहरण के रूप में वाष्प में बदलता है, पौधों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड को अम्ल और ऑक्सीजन में परिवर्तित किया जाता है, और आम तौर पर इन्सानी आहार में अल्कोहल की अभिक्रियाएँ भी होती हैं। रासायनिक अभिक्रियाएँ हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। इस ब्लॉग में, हम रासायनिक अभिक्रियाओं के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करेंगे।

रासायनिक अभिक्रियाएँ सामान्यत: दो या अधिक पदार्थों के बीच परिवर्तन को दर्शाती हैं। इन अभिक्रियाओं में आम तौर पर ऊर्जा का बदलाव होता है और नए पदार्थ उत्पन्न होते हैं। ये अभिक्रियाएँ सामान्यत: विशिष्ट गति, तापमान और दबाव के परिवर्तनों पर निर्भर करती हैं।

एक उदाहरण के रूप में, हवा में स्थलीय या विद्युत धारा के परिवर्तन से अधिक ऊर्जा के संक्रमण का परिणाम होता है, जिससे वायुमंडल में बिजली व आव्रष्टि उत्पन्न होती है।

यहाँ एक और उदाहरण है: चाय बनाने के लिए पानी को उबालना। जब पानी तापमान पर उबालता है, तो वायपरीक्षण के कारण जल के मोलेक्यूल गैस की अवस्था में परिवर्तित होते हैं और जल गैस के रूप में उत्पन्न होता है।

रासायनिक अभिक्रिया में एक या अधिक पदार्थ आपस में अन्तर्क्रिया (इन्टरैक्शन) करके परिवर्तित होते हैं और एक या अधिक भिन्न रासायनिक गुण वाले पदार्थ बनते हैं। किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थों को अभिकारक (रिएक्टैन्ट्स) कहते हैं।

रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थ क्या कहलाते हैं?

रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेने वाले पदार्थों का विस्तार से अध्ययन करना बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि ये पदार्थ अभिक्रियाओं को संभालते हैं और उन्हें संभव बनाते हैं। यहां कुछ मुख्य पदार्थों की एक सूची है:

  1. कैटलिस्ट (संधारक): कैटलिस्ट एक पदार्थ होता है जो रासायनिक अभिक्रियाओं की गति को बढ़ावा देता है बिना खुद किसी परिवर्तन में शामिल होते हुए। यह अभिक्रियाओं की नियंत्रित रफ्तार और प्रभावीता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  2. अभिक्रियां शुरू करने वाले पदार्थ: यह पदार्थ होते हैं जो अभिक्रियाओं को शुरू करते हैं। वे रासायनिक प्रक्रियाओं की प्रेरणा करते हैं और उन्हें संभालते हैं।
  3. उत्तेजक (स्तिमुलेंट): उत्तेजक पदार्थ अभिक्रियाओं की गति या प्रभाव को बढ़ाते हैं। ये पदार्थ अक्सर अभिक्रियाओं को प्रेरित करते हैं और उन्हें तेजी से चलाते हैं।
  4. उत्तेजित पदार्थ (स्टिमुलेटेड न्यूक्लेयटर): इन पदार्थों का उपयोग किसी अभिक्रिया की गति को बढ़ाने के लिए किया जाता है। वे अभिक्रियाओं की धारणी शक्ति को कम करते हैं और अभिक्रियाओं को तेजी से प्रेरित करते हैं।
  5. अभिक्रिया को रोकने वाले पदार्थ (इंहिबिटर): ये पदार्थ अभिक्रिया को रोकते हैं या धीमा करते हैं। वे अभिक्रियाओं की रफ़्तार को कम करते हैं या अभिक्रियाओं को पूरी तरह से बंद कर सकते हैं।

ये पदार्थ रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें संभालते हैं। इनके बिना, कई अभिक्रियाओं का समापन संभव नहीं होता।

अभिक्रिया के फलस्वरूप उत्पन्न पदार्थों को उत्पाद (प्रोडक्ट्स) कहते हैं। लैवासिये के समय से ही ज्ञात है कि रासायनिक अभिक्रिया बिना किसी मापने योग्य द्रव्यमान परिवर्तन के होती है। (द्रव्यमान परिवर्तन अत्यन्त कम होता है जिसे मापना कठिन है)। इसी को द्रव्यमान संरक्षण का नियम कहते हैं। अर्थात किसी रासायनिक अभिक्रिया में न तो द्रव्यमान नष्ट होता है न ही बनता है; केवल पदार्थों का परिवर्तन होता है।

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  • तबीयत घटना अभिक्रिया क्या है उदाहरण सहित लिखिए?
  • हम कैसे कह सकते हैं कि किसी परिवर्तन में रासायनिक अभिक्रिया हुई है या नहीं?

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